Thursday, November 14, 2013

Kis Qadar Anjaan Hai Ye Silsila E Ishq

Dhananjay Parmar
Dhananjay Parmar
Kis Qadar Anjaan Hai Ye Silsila-e-Ishq.. 
Ke Mohabbat To Qayam Rehti Hai Magar.. 
Karne Wale Toot Jate Hai..

Hi friend’s
This is just poem and shayari,
And Story



Universal Children's Day : November 20
दोस्तों भारी मन से आप सभी को Happy Children's Day की सुभकामना .   


!! एक गरीब लड़के की कहानी / व्यथा / दुर्दशा !!


कसूर क्या है मेरा किस बात के लिए मे गुनाहगार हु .,
गरीबी है मेरी सज़ा उसके लिए क्या मे जिम्मेदार हु ..??

खेलने की उम्र में मुझे मजदुर बना दिया ...
मेरे पिता ने मेरा सौदा एक बाज़ार में माँ से बिन बोले करा दिया ....

चार भाई और दो बहने है मेरी उनकी लिए माँ ने तीन रोटी बनायीं है ,
माँ की ममता तोह नहीं लेकिन उसके झाड़ू से मार जरुर खाई है.................!!

अगर दो रुपये कम कमाए है तोह पिता ने भी जानवरों सी मेरी पिटाई लगायी है ,
पढने को एक अक्षर नहीं आता है , गरीब हु में यही दर्द मुझे सताता है..............!!

एक दिन मेरे पास भी बंगला होगा.. एक दिन मेरे पास भी Motar Car होगी ..
ये ही सपने देख के मे हर रात... नींद में मुस्कुराता हु ....
आंखे खुलती है तोह दर्द भरी हकीकत से मे टकरा जाता हु...............!!

धुल में मेरी हर सुबह की शुरुवात होती है .,
हर सपना रह जाता है अधुरा और अंधेरो में उजालो की बात होती है..............!!

दुनिया का हर इन्सान हमसे कतराता है ....
दया तो होती है उनके चेहरों पे
पर कोई अपनी साफ़ दुनिया छोड़ के हमारी गंदगी साफ करने नहीं आता है ...
क्या हमे सहारा देना भी कोई गुनाह है ....
या हमारे लिए कुछ ना करना... जाती - धरम की सौगात है...............!!

नीची जाती है इनकी... सब लोग हमे ऐसे बुलाते है ....
पर ये उंच - नीच तय करने वाले लोग खुद भगवान के गुनेहगार कहलाते है.........!!

भीख के पैसे नहीं हमे प्यार चाहिये .....
माँ की ममता और पिता का दुलार चाहिये....
कुछ अक्षर हम भी पढ़ पाये ऐसा हमे संसार चाहिये ....
खिलोनो से हम भी खेले बस हमे जिन्दगी में 
ऐसे पलो की बरसात चाहिये......... ऐसे पलो की बरसात चाहिये....................!!


  

Dhananjay Parmar
Dhananjay Parmar